“रूह से रूह तक”
रिश्ते शब्दों से नहीं,
एहसासों से बनते हैं,
कुछ लोग दूर रहकर भी
दिल के बहुत करीब रहते हैं।
न कोई वादा बड़ा होता है,
न कोई रिश्ता छोटा,
जहाँ सच्चाई बस जाए,
वहीं दिल को मिलता है सहारा।
कभी खामोशी भी कह देती है
वो बात जो शब्द नहीं कह पाते,
कुछ अपने ऐसे होते हैं
जो बिना बुलाए भी पास चले आते।
रिश्ता वही नहीं
जो हर पल साथ दिखाई दे,
रिश्ता तो वो है
जो मुश्किल में हाथ थाम ले।
समय बदलता है,
लोग बदलते हैं,
हालात भी बदल जाते हैं,
पर सच्चे रिश्ते
दिल में अपनी जगह बनाए रखते हैं।
कभी रूठना, कभी मनाना,
कभी हँसना, कभी रोना,
यही तो रिश्तों की खूबसूरती है,
एक-दूसरे में खुद को खोना।
न दौलत चाहिए,
न कोई बड़ी पहचान,
बस दिल में हो विश्वास
और रिश्तों में सम्मान।
कभी किसी के आँसू पढ़ लेना,
कभी बिना पूछे दर्द समझ लेना,
यही तो प्रेम है,
यही तो इंसानियत है।
कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं,
कुछ रास्तों में बन जाते हैं,
और कुछ अनजान लोग
धीरे-धीरे अपनी जान बन जाते हैं।
रूह से रूह का रिश्ता
दिखाई नहीं देता,
लेकिन महसूस होता है।
वह दूरी में भी पास होता है,
खामोशी में भी आवाज़ होता है,
और अकेलेपन में
एक खूबसूरत एहसास होता है।
इसलिए रिश्तों को संभालकर रखना,
हर दिल को प्यार से छूना,
किसी के भरोसे को मत तोड़ना,
और किसी अपने को कभी मत खोना।
क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है,
कल किसने देखा है?
आज जो तुम्हारे पास हैं,
उन्हें आज ही अपना कह दो।
शायद यही रिश्ता
कल याद बन जाए,
शायद यही इंसान
तुम्हारी जिंदगी की
सबसे खूबसूरत वजह बन जाए।
रिश्ता खून से बने या एहसास से,
सच्चा हो तो उम्रभर रहता है।
कुछ रिश्ते दिल से शुरू होते हैं,
और फिर…
रूह से रूह तक पहुँच जाते हैं। ❤️🌸