प्रेम की अहमियत...
तुम लाख चाहकर भी सच्चे प्रेम की अहमियत..
हर पल, हर घड़ी, हर दिन, हर साल भूला नहीं पाओगी
चाहकर भी मन से मेरी छवि मिटा नहीं पाओगी |
क्योंकि तुम्हारी धड़कन में मेरा ही स्पंदन मिलेगा
चाहे मेरा अस्तित्व पैरों तले रौंद भी डालो ,
चाहे मेरा स्नेह के ढ़ेर सारे पत्र जला भी डालो
चाहे मेरे मन्नत के धागे तुरंत तोड़ भी डालो,
मैं फिर भी एक पुष्प बनकर सदा ही प्रिये..
तेरी ही राह में खिल जाऊंगा |
चाहे तुम जितनी भी दूर चली जाओगी
मैं उतना ही तुम्हारे पास चला आऊंगा |
चाहे तुम जितनी भी नाराज़ क्यों न हो ?
मैं उतना ही तुम्हें मनाने दौड़ता चला आऊंगा |
चाहे तुम मेरी प्रत्येक स्मृति हृदय से निकाल दों..!
फिर भी अपने अंर्तमन में मेरा ही एहसास पाओगी ,
हर धड़कन में मेरी ही आहट सून पाओगी
हर सांस में मेरी सांस तुम्हें मिलेगी |
मेरा वजूद मिटेगा पर मेरी अनुभूति नहीं मिटेगी ,
मेरा ख्व़ाब टूटेगा पर मेरी गहरी संवेदना नहीं मिटेगी
समय बीत जाएगा पर मेरी यह प्रीत कभी नहीं छूटेगी ,
तुम चाहो मुझे विस्मृत कर देना संसार की भांति..
पर मेरे प्रेम की छाया सदैव जिंदा रहेगी तुम्हारे भीतर
मेरे काव्य की एक एक पंक्ति सिर्फ़ तुम्हें पुकारेंगी |
मेरे चक्षु की एक एक दृष्टि सिर्फ़ तुम्हें ढूढ़ेगी,
केवल मृत्यु की अनंत गहराइ तक ||
©®- शेखर खराड़ी
तिथि- २२/८/२०२६