अंगुलिमाल ( उल्टा पिरामिड़ काव्य श्रेणीं )
अनंत करुणा का निर्मल-स्वच्छ भाव
एक हत्यारे के हृदय से टकराकर ,
वो घमंड़ क्षणभर में मिट गया |
क्रूर हिंसा के मार्ग से रूठकर ,
अंगुलियों माला से छूटकर
बुद्ध की शांत छवि देखकर ,
तुरंत नया जीवन पाकर |
किन्तु पश्चपात से
अंगुलिमाल
भीतर
रोता
हैं।
©®- शेखर खराड़ी
तिथि-२१/८/२०२६