कितनी बार बस महसूस करना होता हैं हर कुछ
!अनचाहा!
अनचाहा घर अनचाहा डर अनचाहा खाना अनचाहा गाना
कितना कुछ घट रहा होता
मगर फिर भी जाना पड़ता है
अनचाहा सफर अनचाहा असर अनचाहे लोग
अनचाहे बाते
कुछ आगे जाते ही
फिर मिल जाती है अनचाही बाते, अनचाही मुलाकाते
कुछ आते जाते , बे फ़िक्रे राते
मदहोशी की हालत में कुछ जस्बात
इतना अनचाहा सब चल रहा फिर दिल उदास नहीं
बस कहता है चुप रहो
अनचाहा तेरे पास नहीं
अनजानी इन आंखों में एक अनचाहा प्यार मिला
अनचाही मुलाकाते में होना था
वो न हुआ अनचाहा सब खोता रहा
अनचाहा में रोता रहा
बे बुनियादी रही
अनचाहा सब टूट गया
अनचाहा कुछ छूट गया
- Alone Soul