मैं और मेरे अह्सास
एक ही नजर
बरसों हुए आप से मुलाकात नहीं हुई l
मन को संतोष देने वाली बात नहीं हुई ll
काश दूर से ही दीदार ए यार हो जाता l
एक ही नजर देख सके सौगात नहीं हुई ll
खुद ही मिलने आ जाते तो अच्छा होता l
कुछ आप की तरफ़ से इनायत नहीं हुई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह