ये कलयुग है साहब यहां ऐसा ही होता है, यहां हर चेहरे के ऊपर एक नकाब होता है। यहां या तो नारी का अपमान या तो बेकसूरों पर सवाल होता है, ये कलयुग है साहब यहां सच्चों पर ही अत्याचार होता है। यहाँ इमानदारी का पुतला रोता और बेईमानी का पुतला हंसता है। ये कलयुग है साहब यहां हर चेहरे पर एक नकाब होता है।
- Ashu Ashu
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