आपका दिल गुलाब हो जाए ।
और आदत खराब हो जाए ।।
शाम को साथ बैठिए आ के ।
फिर पुरानी शराब हो जाए ।।
दिल्लगी के सवाल पर मेरे ।
आपका भी जवाब हो जाए ।।
खर्च कितना हुआ नफासत पे ।
आज इसका हिसाब हो जाए ।।
डूबकर के 'विजय' मुहब्बत में ।
बेख़बर बेहिसाब हो जाए ।।
@डाॅ.विजय प्रताप शाही