दृष्टिकोण
कविता
गाँव में एक हाथी आया,
सब जगह शोर मच गया।
'हाथी आया, हाथी आया',
उस भीड़ में छः अंधे
भी देखने आए।
किसी ने सिर्फ पूँछ पकड़ी,
किसी ने सिर्फ सूँड पकड़ी,
किसी के हाथ आया कान।
तो सबने की अलग व्याख्या
हाथी कैसा, समझा जिसने जैसा।
हमारी दुनिया भी ऐसी है,
कुछ गलत या सही हो,
वही एक के लिए गलत,
दूसरे के लिए सही हो।
जहाँ आज सब व्यस्त हैं
एक-दूसरे की चुगली में -
सास-बहू की, बहू-सास की,
ननद-भाभी की, भाई-भाई की।
जिसकी जैसी सोच, उसे
वैसी ही दुनिया दिखती है।
स्वार्थ के आगे अंधे हैं यहाँ,
किसी को खूबी कहाँ दिखती है?
बस जरा सी सोच बड़ी करने से
दुनिया सुंदर बन सकती है।
---dr वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi