“मौत का दूसरा नाम”
मौत का दूसरा नाम क्या है…?
शायद अँधेरा
वो जो रोशनी को निगल जाए
और दिल के भीतर
हर रास्ता बंद कर दे…
कभी कभी,
मौत इंतज़ार भी होती है
लंबा, सर्द, और बेरहम
वो जो जीते जी इंसान को
धीरे धीरे अंदर से खा जाता है…
कुछ लोग कहते हैं
मौत अंत है
पर मेरे लिए,
वो उन तमाम लम्हों का
आख़िरी हिसाब है
जिन्हें हमने जिया नहीं…
सिर्फ़ सहा है।
प्राची तंवर …….