उसकी आँखों में एक अजब उदासी थी,
लेकिन होठों पर एक धीमी हंसी थी।
ऐसे लग रहा था मानो कुछ तो है,
आंखें कहीं और ही घूमती,
लेकिन फिर भी मुझे देख रही थी,
जैसे मैं कोई हीरा हूं,
और वह मुझसे बहुत दूर है।
मानो एक कसक सी थी
उसके चेहरे पर,
लेकिन फिर भी वह दिल से खुश थी।
क्या था यह अजीब सा संगम,
मुझे समझ ही नहीं आया
वह इतनी खुश थी..!
या फिर वह मुझे बता ही नहीं पाई
कि वह कितनी खुश है ?
अजीब मुस्कान थी,
जैसे थोड़ा दर्द हुआ,
थोड़ी चोट लगी,
लेकिन मीठा भी लगा,
थोड़ा तीखा
और थोड़ा तेज सा लगा।
लेकिन कुछ तो था…
बात तो थी उसमें,
पता नहीं क्या बात थी
मैंने पूछा नहीं,
और वह बता नहीं पाई...🫠