"मेरे दिल को भा जाए"
मिलने जब भी आओ, तोहफ़ा एक नहीं… दो लाना तुम,
एक ईमानदारी, और दूसरी वफ़ा लाना तुम…
मैं वो लड़की नहीं, जो भारी चकाचौंध में खो जाए,
मुझे तो बस ऐसा महबूब चाहिए, जो मेरे दिल को भा जाए…
न झुमके, न चूड़ियाँ, न काजल मेरा दिल चाहता है,
कोई अदा-ए-तहज़ीब ऐसी हो, जो मेरे दिल को भा जाए…
जिसमें लफ़्ज़ों से ज़्यादा ख़ामोशियाँ बात करें,
जिसमें आँखें ही दिल का पैग़ाम सुनाएँ…
जो साथ दे सिर्फ़ ख़ुशी में ही नहीं, ग़म में भी,
और मेरी रूह तक को अपना बना जाए…
मुझे दौलत, शोहरत, या शान-ओ-शौकत नहीं चाहिए,
बस एक मोहब्बत हो जो हर इम्तिहान में रास आ जाए…
प्राची तंवर …….