—गुरूर का महल—
मजाक बनाकर किसी का खुद पर गर्व करना,
यह हुनर है तो फिर इस हुनर से तौबा करना।
हर शख्स यहा अपने वजूद का है मालिक,
किसी की सादगी उसकी कमजोरी मत समझना।
रह जाएगी वो सभी ऊचाई उस शख्स से नीचे,
जिसने तुम्हे सीखाया हर मुश्किल मे आगे बढ़ना।
अहसान भूलाकर खुदको क्या समझते हो तुम,
औकात याद आ जायेगी जब वक्त से होगा लड़ना।
गुरूर का ये महल कब तक रहेगा टीका,
एक ना एक दिन तो तय है इसका गिरना।
-MASHAALLHA