"पहली तनख्वाह" सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि हर उस बेटे और बेटी का सपना है जो अपने माता-पिता के त्याग, प्रेम और संघर्ष का ऋण चुकाना चाहता है।
इस कविता में मैंने उन भावनाओं को शब्द देने का प्रयास किया है जो पहली तनख्वाह मिलने की कल्पना मात्र से मन में उमड़ती हैं !