अब ना पूछ कि इस दिल का हाल क्या होगा,
जो होना था वो हो गया, अब मलाल क्या होगा।
किनारे से ही देख ली हमने गहराई समंदर की,
डूब ही गए जो इसमें, तो फिर सवाल क्या होगा।
नजरें चुराकर वो हमसे मुस्कुराते हैं इस तरह,
खुदा ही जाने अब दिल का हश्र-ओ-मलाल क्या होगा।
शमां बुझ चुकी है, मगर धुआं अभी बाकी है,
इस बिखरी हुई महफिल का अब ख्याल क्या होगा।
चाहत में तेरी हम खुद को ही भूल बैठे हैं,
इससे ज्यादा मोहब्बत का और कमाल क्या होगा।