मेरी अपनी कहानी
अगर कभी लिखूँ अपनी कहानी, तो पसीने से भीगे अरमान लिखूँगा। जो सपनों के लिए नींद छोड़ दी, उन रातों का हर इम्तिहान लिखूँगा।
हर ठोकर जो रास्ते में मिली,
उसे ही अपनी पहचान लिखूँ
जो हारकर भी रुका नहीं, उस हिम्मत का सम्मान लिखूँगा।
मैं शोर नहीं अपनी सफलता का, खामोशी में बना वो आसमान लिखूँगा। और जब पूछे दुनिया कैसे पहुँचा यहाँ, तो मेहनत को ही अपना नाम लिखूँगा।
जो अपने थे, वही दूर हो गए, कुछ अपनों ने ही जख्म दिए गहरे । फिर भी मुस्कुराकर मैंने चलना सीखा, हर दर्द को दिल के अंदर ही ठहरे ।
न कोई सहारा था, न कोई हाथ था, बस खुद पर था यकीन और विश्वास । अँधेरे रास्तों में भी ढूँदी मंज़िल अपनी, यही मेरी कहानी, यही मेरी प्यास ।
अगर कभी लिखूँ अपनी कहानी, तो संघर्षों को ही मैं पहचान लिखूँगा। जो टूटे थे, वही जुड़कर सवरे हैं, उन बिखरे लम्हों का गुमान लिखूँगा।
.......viijjuu......