*सुकून-ए-इश्क़*
तेरी यादों की खुशबू से महकता शाम का मंज़र,
जैसे तपती हुई राहों पे ठंडी छाँव का मंज़र।
न दुनिया की कोई हसरत, न ही पाने की रुस्वाई,
तेरे पहलू में मिल जाए, मुकम्मल चैन की गहराई।
बिना बोले ही सब कहना, वो आँखों की इनायत है,
मोहब्बत रूह से हो तो, इबादत ही इबादत है।
हवा जो छू के गुज़रे तो लगे पैगाम है तेरा,
धड़कते दिल की हर धड़कन में बस इक नाम है तेरा।
किनारे मिल ही जाते हैं, जो लहरों पर भरोसा हो,
सुकून उस दिल को मिलता है, जिसे तुम पर भरोसा हो।