आज रात किसी तरह सो जाएं
कविता
अंदर खालीपन है
नहीं पता क्यों
बस सन्नाटा ही सन्नाटा है
सांसे चल रही है जिंदा हूं
आंखें खुली है जाग रहा हूं
और यह दुनिया भी देख रही हूं
फिर भी सामने अंधेरा ही अंधेरा है
जैसे मेरे लिए कुछ है ही नहीं
बस अकेलापन गहरा अकेलापन है
ऐसा लग रहा है कि
मेरी कोई इस दुनिया में है ही नहीं
दिल पर चोट लगी है
इसलिए एसा लग रहा है
या ऐ डिप्रेशन है
नहीं पता मुझे समझ में नहीं आ रहा
मेरे भावनाएं बस अकेलापन से भरा हुआ है
बस बेवजह की काम कीई जा रही हूं
बिना प्रणाम जान
ऐसा लग रहा है कि
खुद को थका ही नहीं रही
बल्कि सजा भी दे रही हूं
इस दुनिया में होने की
मेरा होना सही है या गलत
नहीं पता
पर अभी लग रहा है
मुझे होना ही नहीं चाहिए इस दुनिया में
मुझे वहा अकेलापन और खालीपन महसूस हो रहा है
जिसमें दम घुस रहा है
खुद की जान लेने का मन कर रहा है
फिर भी खुद को उलझाना चाहती हूं
पूरी तरह से थकना चाहती
समझ में नहीं आ रहा है कुछ
पर खुद को समझना चाहती हूं
कि आज रात किसी तरह सो जाए
बस आज दिन गुजरे
शायद कल यह अकेलापन यह बेचैनी खत्म हो जाए
इस आस से
खुद को कुछ और देर थामे रहने के लिए मजबूर कर रहा हूं