तू एक हवा है
कविता
मैं जानती हूं खुद को
फिर भी चाहती हूं तुझको
मुझे पता है तू एक हवा है
फिर ही बावरी मैं
तेरे पीछे भाग रही हूं
बिना सोचे कि तुम मेरे हाथ ना आओगे
फिर भी बावड़ी में तेरे पीछे भाग रही हूं
मेरी दुनिया का
मेरी दुनिया में तू है मेरा रांझा
फिर तू क्यों नहीं आता
आके मुझे समझाजा
कुछ इस तरह हवाओं से दिलगी अच्छी नहीं बताता
मुरझाऐ हुए फुल की तरह मुरझा गई हुं मै
बेचैन बेताव तन्हा हो गई हूं मैं
तुम्हारा इंतजार करते हुए
तुम्हारे राहों में ही मैं सो गई हूं
इस आस में ऐ हवा
दौड़ती हुए तुम अचानक ठहरते
और नज़रें फेर कर मुझे एक नजर भर देखते
पर कभी तुम्हारे कदमें ठहरे ही नहीं
अपनी राहों पर चलते हुए
तुम कभी मुरे ही नहीं
मुझे देखने के लिए
मैं जानती हूं तुझ को
फिर भी चाहती हूं तुम्हें
मुझे पता है तू एक हवा है
और यह हवा मेरी सांसों के लिए जरूरी है
चाहे वह ठहरे न ठहरे
मैं ठहर गई तुम्हारी राहों पर
तुम्हारे कदमों की आहट सुनने के लिए