"खामोश लहरों की दास्तां"
अब टूटे दिलों को मरम्मत नया नहीं चाहिए,
इस बहती नदी को कोई किनारा नहीं चाहिए।
खामोशियों में दबी हर एक धड़कन कहती हैं,
अब किसी के सहारे की परछाई नहीं चाहिए।
राहें बदल गईं, अब तो मौसम भी बदल गए,
फिर भी ठहराव हैं, किसी नज़ारा नहीं चाहिए।
दर्द भी अब साथी है, खुशी भी अब साथी है,
तन्हा सफ़र हैं, दूजा कोई सहारा नहीं चाहिए।
जख्मों की परतें खोलती रहीं हैं वो हर यादें,
इस वीराने में अब कोई हमारा नहीं चाहिए।
अब इन लहरों के संग बहता ए दर्दे दास्तां,
'सोनी' दिल हैं मेरा, कोई पराया नहीं चाहिए।
- सोनी शाक्य
मेरे दोस्त भीड़ू ने लिखा पसंद आया तो मैंने भी अपने page पर रखने से रोक नहीं पाया।