Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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सोचा मैं तितली हूं


थकावट के बाद भी मैं ने थोड़ा काम किया
और फिर दोस्तों के साथ गई और सांस लिया
और फिर आई थोड़ा काम किया


जीने का जी नहीं था फिर भी जीने की सूची


नल से निकलते ठंडा पानी सर पर डाला और गहरी सांस लिया
और फिर शगुन से बाल धोया
और नहाया


और फिर अपनी पसंदीदा कपड़े पहने
जो कंफर्टेबल था


और फिर आईने के सामने खड़ी रहकर खुद को दिखा और
वो चेहरा जो मैंने देखा
वह मेरी ही था


ना वह खूबसूरत था
ना सुखा
बस था शिकायतों से भरा


कुछ देर उस चेहरे को निहारता हुआ सोचा
इसमें नूर नहीं है
तो मुस्कुराई


शिकायत की हजारों लव्ज थे
चेहरे के साथ होठों पर भी
फिर भी मुस्कुराई




और फिर उल्टे कदम लौट कर
घर की छोटी सी अलमारी के पास आए
अलमारी खोली


और हाथ डालकर डोटोलते हुए
उस से बालों की पिन निकाला
और छोटी सी झुमका भी
और पिन बालों में डाला


और झुमका कानों में डालते हुए
फिर मैं आईने के पास आई
और झुमका कानों डालते हुए
मैं आईने में खुद को दिखा
और मैं फिर से मुस्कुराए



और फिर से बालों के पिन
बालों से निकलते हुए होटो के बीच में दवाई
और फिर बालों को अपने हाथों से सावरा
और फिर उन में पिन लगाया


और फिर अपनी बेबी हेयर को अपने हाथों से
आगे करते हुए मुस्कुराई

और सोचा मैं तितली हूं
कितने दिनों के बाद खुद को आईना में देखा
और सबरी हूं

हां मैं तितली हूं
इतराने के लिए ही बनी हूं


और यह बगिया मेरी है
और सोचा ही नहीं कि इस बगिया में माली भी है
और सोचा ही नहीं की माली मेरा दुश्मन भी हो सकता है



हां मैंने सोचा मैं तितली हूं
इतराने के लिए ही बनी हूं
पर सोचा ही नहीं की
तितली किसी मनचले के हाथों के बीच आकर मिसला जाऐगे


हां मैंने सोचा ही नहीं की
आसमान की तरफ देखना मेरी नसीब है
ऊरना नहीं





अगर कविता अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯

Hindi Poem by AbhiNisha : 112020561
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