क्या आपने कभी जज को वकील के माध्यम से पैसे देकर कोई फैसला लिया है ?
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जजों के भ्रष्टाचार की बात करना भारत में गैर कानूनी है। अत: इस सवाल का जवाब कोई भी आपको ठीक से नहीं देगा।
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भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्ट महकमा अदालतें है। एक तरह से अदालतें भ्रष्टाचार की गंगोत्री है। देश के सारे प्रकार के हर स्तर के भ्रष्टाचार की जड़ में भ्रष्ट जज बैठे है। जब जजों का भ्रष्टाचार नागरिको के सामने आने लगा तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने ईमानदार होने का एक बेहद सीधा और आसान तरीका निकाला। उन्होंने "न्यायपलिका की अवमानना" का कानून छापकर जजों के भ्रष्टाचार पर तबसरा करने को गैर कानूनी बना दिया। और इस तरह एक झटके में भारत के जज फ़रिश्ते बन गए !!
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मेरी मान्यता है कि --
भारत की सुप्रीम कोर्ट के 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 10% निकम्मे है एवं उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
हाई कोर्ट के 80% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। शेष 20% निकम्मे है, और उन्हें भारत की अदालतें सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
निचली अदालतों के 70% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है। और उन्हें भारत की अदालते सुधारने की कोई फ़िक्र नहीं है।
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अमूमन एक कार्यकर्ता के तौर पर मैं उस व्यक्ति को सिरे से खारिज कर देता हूँ, जो जजों के भ्रष्टाचार पर अपना रूख साफ़ नहीं करता या जजों के भ्रष्टाचार पर बोलने से कतराता है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर बोलता है तो उसे सबसे पहले जजों के भ्रष्टाचार पर बोलना चाहिए। क्योंकि जब तक जजों का भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा तब तक किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में कमी नहीं लायी जा सकती।
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समाधान ?
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जूरी सिस्टम
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यदि भारत में जूरी सिस्टम लागू कर दिया जाता है तो मेरा मानना है कि सिर्फ अगले 3 महीने देश में हर प्रकार के भ्रष्टाचार में 80% तक की गिरावट आ जाएगी। जूरी सिस्टम के अलावा मैं जजों के भ्रष्टाचार का कोई समाधान नहीं देखता। हाँ , थोडा आंशिक सुधार जजों पर वोट वापसी प्रक्रियाएं लागू करके भी लाया जा सकता है। अन्य कोई मार्ग नहीं।
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मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ कि कैसे निरंकुश जजों का भ्रष्टाचार देश की बैंड बजाता है, और कैसे वोट वापसी इसमें सुधार लाता है।
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2016, कैलिफोर्निया के जज एरोन पर्सकी को नागरिको ने वोट वापसी क़ानून का प्रयोग करके निकाल दिया था। दरअसल एक 20 वर्षीय युवक ने नीम बेहोश युवती के साथ बलात्कार किया था, और नागरिको की जूरी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद पर्सकी ने उसे सिर्फ 6 माह की सजा दी थी !! टर्नर पर जो आरोप साबित हुए थे, उनमे उसे 14 वर्ष तक की सजा दी जा सकती थी , किन्तु पर्सकी ने सिर्फ 6 माह की टोकन सजा दी !! पर्सकी 80 सालो में पहले जज थे, जिन्हें नागरिको ने वोट वापसी के अधिकार का प्रयोग करके पद से बर्खास्त कर दिया था।
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California Voters Remove Judge Aaron Persky, Who Gave a 6-Month Sentence for Sexual Assault
Aaron Persky, the California judge who drew national attention in 2016 when he sentenced a Stanford student to just six months in jail for sexually assaulting an unconscious woman, was recalled on Tuesday, according to The Associated Press. He is the first judge recalled in California in more than 80 years.
With nearly all precincts reporting on Wednesday, just under 60 percent of voters were in favor of removing Judge Persky from the Santa Clara County Superior Court, where he had served since 2003. Cindy Hendrickson, a prosecutor, was elected to replace him.
चित्र में आप इस भ्रष्ट जज को देख सकते है जो मतदान के दिन तख्ती लेकर नागरिको से अपील कर रहा था कि उसे नौकरी से निकालने के लिए वोट न करें !!
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तो इस तरह वोट वापसी का प्रयोग करके अमेरिका के नागरिक नेता-पुलिस एवं जजों को चेतावनी देते रहते है, ताकि अन्य नेता-जज-अधिकारी ईमानदार बने रहे। इस कहानी में एक सबक यह भी है कि लोग सब जगह एक ही जैसे होते है। चाहे भारत हो या अमेरिका। जिसे भी आप निरंकुश ताकत देंगे, वो अपना रंग दिखाने लगेगा। जब तक उन पर डंडा तना रहेगा तब तक ही वे ठीक से काम करते है।
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जजों को ईमानदार बनाए रखने का यह बेहद सरल एवं निरापद तरीका है - एक भ्रष्ट जज को दंड दो , ताकि उसका हश्र देखकर अन्य जज तमीज में काम करने लगे।
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और भारत का हाल आपको मालूम ही है। सारा जोधपुर जानता है कि, सलमान ने हिरण मारे थे, और इसके भर भर के सबूत मौजूद है। और सारा मुंबई जानता है कि उस रात दारु पीकर गाड़ी दबंग खान ही चला रहा था। जिन सबूतों के आधार पर सेशन जज ने सलमान को सजा सुनाई, उन्ही सबूतो के आधार पर हाई कोर्ट जज ने सलमान को बरी कर दिया। निचोड़ यह है कि, अदालत में सबूत कोई मायने नहीं रखते। मायने यह रखता है कि क्या जज किसी सबूत को सबूत मानने को राजी है या नहीं।
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सारा मामला जजो के विवेक यानी कि उन्हें दी गयी घूस पर टिका हुआ है, न कि जिरह और सबूतों पर !! भ्रष्ट जजो को नौकरी से निकालने और दंड देने की शक्ति जब तक नागरिको के पास नहीं आएगी, जज इसी तरह के काण्ड करते रहेंगे।
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भारत में वोट वापसी क़ानून लाने के लिए हमें जो इबारत गेजेट में छपवाने की जरूरत है उसका प्रस्तावित ड्राफ्ट निचे दिए गए लिंक पर देखें। यदि ये इबारत गेजेट में छाप दी जाती है तो भारत के प्रत्यके नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी और उन्हें वोट वापसी लेने का अधिकार मिल जाएगा।
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प्रस्तावित वोट वापसी पासबुक