My Lovely Wife
भाग 3 : दोस्ती की शुरुआत
राधा के जाने के बाद भी राहुल काफी देर तक वहीं खड़ा रहा।
उसके कानों में बस एक ही आवाज़ गूंज रही थी —
“अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।”
उस दिन के बाद राहुल को कॉलेज हर दिन नया लगने लगा।
अब वो क्लास से ज़्यादा
लाइब्रेरी और कैंटीन में समय बिताने लगा,
शायद फिर से राधा दिख जाए।
कुछ दिनों बाद लाइब्रेरी में फिर मुलाक़ात हुई।
राधा एक किताब ढूँढ रही थी,
लेकिन ऊँची शेल्फ़ तक उसका हाथ नहीं पहुँच रहा था।
राहुल ने हिम्मत करके कहा,
“मैं मदद कर दूँ?”
राधा ने मुस्कराकर सिर हिला दिया।
“हाँ, प्लीज़।”
राहुल ने किताब निकालकर उसे दे दी।
उस पल दोनों के हाथ हल्के से टकरा गए।
वो छोटा-सा स्पर्श,
लेकिन दिल में बड़ी हलचल।
“थैंक यू, राहुल,”
राधा ने कहा।
“आप कौन-सी किताबें पढ़ती हैं?”
राहुल ने पहली बार खुलकर सवाल किया।
“कहानियाँ…
जिनमें सच्चे रिश्ते होते हैं,”
राधा ने जवाब दिया।
राहुल मुस्कराया,
“मुझे भी कहानियाँ पसंद हैं।”
उस दिन दोनों देर तक बात करते रहे —
क्लास, किताबें, ज़िंदगी और सपने।
अब जब भी कॉलेज में मुलाक़ात होती,
एक मुस्कान ज़रूर होती।
धीरे-धीरे
लाइब्रेरी उनकी पसंदीदा जगह बन गई।
और दोस्ती,
जो अनजाने में शुरू हुई थी,
अब गहरी होने लगी थी।
राहुल समझ रहा था —
ये दोस्ती अब साधारण नहीं रही।
लेकिन राधा के दिल में क्या चल रहा था?
ये वो नहीं जानता था।