एक प्रेरणादायक कहानी
एक दिन की बात है। बादशाह अकबर अपने दरबार में कुछ उदास बैठे थे। दरबारियों ने कारण पूछा तो अकबर ने गहरी सांस लेकर कहा,
“बीरबल, आज मुझे लगता है कि इंसान कितना भी प्रयास कर ले, सफलता हमेशा उसके साथ नहीं रहती।”
बीरबल मुस्कुराए और बोले,
“जहाँपनाह, क्या आप सच में ऐसा मानते हैं?”
अकबर ने कहा,
“हाँ। कई बार मेहनत करने के बाद भी परिणाम नहीं मिलता। तब मन टूट जाता है।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा,
“यदि अनुमति हो, तो मैं इस प्रश्न का उत्तर एक छोटे प्रयोग से देना चाहता हूँ।”
अकबर ने सहमति में सिर हिलाया।
अगले दिन बीरबल दरबार में एक साधारण सा लकड़ी का डंडा लेकर आए। उन्होंने उसे दरबार के बीचोंबीच ज़मीन में गाड़ दिया। फिर बोले,
“जहाँपनाह, कृपया इस डंडे को उखाड़ने का प्रयास करें।”
अकबर ने बल लगाया, लेकिन डंडा नहीं हिला। उन्होंने दरबारियों से कहा,
“देखा, पूरी ताकत लगाने पर भी कुछ नहीं हुआ।”
बीरबल ने मुस्कराकर कहा,
“जहाँपनाह, क्या मैं प्रयास कर सकता हूँ?”
अकबर ने हँसते हुए कहा,
“ज़रूर, लेकिन यह आसान नहीं है।”
बीरबल ने डंडे को दोनों हाथों से पकड़कर जोर लगाने के बजाय, चारों ओर की मिट्टी को धीरे-धीरे हटाना शुरू किया। कुछ ही देर में डंडा आसानी से बाहर आ गया।
दरबार में सन्नाटा छा गया।
अकबर आश्चर्य से बोले,
“यह कैसे संभव हुआ, बीरबल? मैंने तो पूरी ताकत लगा दी थी।”
बीरबल ने शांति से उत्तर दिया,
“जहाँपनाह, आपने शक्ति का प्रयोग किया, लेकिन रणनीति का नहीं। हर समस्या बल से नहीं, समझ से सुलझती है।”
अकबर ने गंभीर होकर पूछा,
“तो क्या यही सफलता का रहस्य है?”
बीरबल बोले,
“सफलता उन लोगों को मिलती है जो असफलता से हार नहीं मानते, बल्कि तरीका बदलते हैं। अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो दूसरा रास्ता खोजते हैं।”
अकबर कुछ क्षण सोचते रहे। फिर उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान आ गई।
“बीरबल, आज तुमने मेरी आँखें खोल दीं। मेहनत के साथ बुद्धि और धैर्य भी ज़रूरी है।”
बीरबल ने सिर झुकाकर कहा,
“जहाँपनाह, जीवन में गिरना नहीं, बल्कि उठकर फिर प्रयास करना ही सच्ची जीत है।”
उस दिन के बाद अकबर ने न केवल अपने निर्णयों में, बल्कि अपने जीवन में भी यह सीख उतार ली—
सफलता ताकत से नहीं, समझदारी और निरंतर प्रयास से मिलती है।