nazariya||
"कर्म और भक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं।
जब कर्म शुद्ध भाव, साफ़ नीयत और बिना लोभ के किया जाता है, तो वही कर्म भक्ति बन जाता है।
और जब भक्ति निष्काम भाव से की जाती है, तो वही स्वयं कर्म का रूप ले लेती है।”
by:pinklotus 🌸❣️
om shiv gorksh aadesh 🙏