कुछ मोहब्बत अधूरी रह जाती है..
चाहा था दिल से, पर कह ना सके,
लब कांपते रहे, पर कुछ कह ना सके।
नज़रों में था इश्क़, पर जुबां खामोश रही,
आज वो पराई है, और हम बेहोश रहे।
दिल की किताब में नाम तेरा लिखा था,
पर तक़दीर के पन्नों में कुछ और ही लिखा था।
सोचा था एक दिन तुझे अपना कहूँगा,
पर वक्त के हाथों में कोई और ही फैसला था।
अब तेरा दामन किसी और का है,
तेरी हँसी किसी और के नाम का है।
मैं मुस्कुराकर तुझे दुआएँ देता हूँ,
पर अंदर से मेरा दिल भी तो बेजान सा है।
- एक अधूरी मोहब्बत की दास्तान