हर लहर में उसकी याद बसी है,
हर ठंडी हवा में वो पास बैठी है,
सागर की गहराई तक जैसे,
दिल के ख्वाबों में वो छुपी है।
हर मोड़ पर नये सवाल करती है,
जैसे जीवन की राहों में उलझी हो।
छोटे से सफर में उसे पाना है,
पुनर्मिलन की आश लगी है।
हर पल जैसे वो दिल के करीब,
पुनर्मिलन की आश लगी है।
हर लहर में उसकी याद बसी है,
हर ठंडी हवा में वो पास बैठी है,
आसमान के तारों जैसे,
लम्हों की रोशनी बन आती हैं।
हर पल वो दिल के करीब,
पुनर्मिलन की आश जगी है।