जैसे जैसे हम बड़े हो रहे हैं रिश्तों में भी एक maturity आ रही है.. जैसे हम differences को respect करना सीख रहे हैं.. दूसरों की life में changes की वजह से उनके साथ मिलने वाले उस time को compromise करना सीख रहे हैं.. उन changes को बिना कोई extra drama किए accept करना सीख रहे हैं.. वो दोस्तियां जहां पागलपन हुआ करता था आज उसमें समझदारी भी add हो गई हैं.. उनकी personal life में changes की वजह से उनका busy रहना अब ख़ुद की value कम होना नहीं समझते.. उनको भी अपना एक space चाहिए ye समझने लगे हैं..
Life की धक्का मुक्की में कब हम इतने बड़े और इतने समझदार हो गए.. पता ही नहीं चला.. वो ज़िद्द करना वो हक़ जताना आज भी है पर पहले जितना नहीं.. ये maturity कभी कभी सही भी लगती है और कभी कभी अखरती भी है.. कि कब और क्यूं हम इतने समझदार हो गए..!!