क्यों?
क्यों गए हम वहाँ,
जहाँ जाना नहीं था?
क्यों ठहरे वहाँ,
जहाँ ठहरना नहीं था?
अगर तुम्हें हमें भुलाना ही था,
तो इतना अपना बनाया क्यों था?
काश, उनसे मिले ही न होते,
काश, उनके एहसासों से गुज़रे ही न होते,
न उन्हें जाना होता,
न अपने मन को यूँ पहचाना होता।
कहा था हमने—
“कभी दोस्ती मत तोड़ना हमसे,”
फिर क्यों तोड़ दी वह डोर,
जो बाँधी थी कभी इतने अपनेपन से?
हम तो आज भी
तुम्हें भुला नहीं पाए,
न जाने कितनी बार खुद से कहा—
“भूल जाओ उसे,”
मगर दिल ने हर बार कहा—
“नहीं…”
क्या हम बुरे थे?
क्या तुम्हारे लायक नहीं थे?
कह देते कभी—
“तुम अच्छे नहीं हो मेरे लिए,”
हम शायद उसी पल
खुद को तुमसे दूर कर लेते।
तुमने रोका भी नहीं,
हमारे एहसास को टोका भी नहीं,
मेरे इज़हार को सुना,
मेरे प्यार को ठुकराया भी नहीं—
फिर अचानक
इतनी दूरी क्यों?
हमने बहुत कोशिश की
तुम्हें भुलाने की,
हर रोज़ अपने दिल को समझाया,
मगर जितना भुलाना चाहा तुम्हें,
उतना ही मन ने
तुम्हें अपने भीतर पाया।
कौन हो तुम?
और कौन हैं हम?
किस रिश्ते में बँधे थे हम?
कहाँ हैं हम आज,
और कहाँ हो तुम?
सोचा था—
कभी इज़हार नहीं करेंगे,
अपने दिल की बात
कभी तुमसे नहीं कहेंगे,
फिर न जाने क्यों
दिल की बात जुबाँ तक आ गई।
तुम हमें मना कर सकते थे,
कह सकते थे—
“नहीं, ऐसा मत सोचो,”
मगर तुमने कभी मना नहीं किया।
तुमने कहा था—
“कह सकती हैं आप
अपने मन का इज़हार मुझसे,
मैं उसे प्यार से सुनूँगा।”
हमने कह दिया सब कुछ,
जो बरसों से दिल में था,
और तुमने सुनकर कहा—
“मैं नासमझ हूँ इस एहसास के सामने,
न चाहकर भी
इसे स्वीकार नहीं कर सकता।”
फिर तुमने कहा—
“तुम बहुत अच्छी हो,
अपनी पढ़ाई और अपने लक्ष्य को
कभी मत भूलना,
वही तुम्हारा जीवन है।”
तुम्हारी बात मान ली हमने,
अपने कदम लक्ष्य की ओर बढ़ा लिए,
मगर दिल को कैसे समझाएँ—
जो तुम्हें भूलने के लिए
आज भी तैयार नहीं?
पता नहीं कौन है वह,
जिसके लिए तुमने
हमसे दूरी बना ली।
कौन है वह?
क्यों है वह?
क्या इतना अपना होकर भी
हम तुम्हारे अपने नहीं थे?
जब भुलाना ही था,
तो इतना अपना बनाया क्यों?
जब जाना ही था,
तो जीवन में आए क्यों?
जब दूर ही जाना था,
तो दिल के इतने करीब आए क्यों?
शायद तुम भी
मेरी ज़िंदगी का वही एक एहसास थे,
जिसे भुलाना चाहती हूँ,
पर जितना भूलती हूँ,
उतना ही याद आते हो।
क्यों मिले थे हम?
क्यों दोस्ती हुई?
क्यों ये एहसास हुए?
और जब भुलाना ही था,
तो इतना अपना बनाया ही क्यों?
क्यों…?