मैं और मेरे अह्सास
कुछ अश्क मेरी आँख के
कुछ अश्क मेरी आँख के उनकी आँखों से बहने लगे l
दिल में छिपे दर्द अश्कों के द्वारा मुझे सब कहने
लगे ll
ना रोकने की कोशिश की ना टोकने की हिम्मत
है l
लगातार खामोशी से आँखों के इशारों को सहने
लगे ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह