मैं और मेरे अह्सास
वक़्त नाजुक है
वक़्त नाजुक है सँभलकर जीना सीख लो l
वक़्त की नजाकत समजकर जीना सीख लो ll
बड़ी तेज रफ़्तार से जिंदगी भागे जा रही l
आंधियों से सरककर जीना सीख लो ll
कोई किसीके लिए नहीं रुकता है जहाँ में l
खुद का वक़्त बदलकर जीना सीख लो ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह