नासमझ को समझाया जा सकता है,अनपढ़ को भी समझाया जा सकता है गलती करने वाले को भी सही रास्ता दिखाया जा सकता है लेकिन सबसे मुश्किल उसे समझाना है,जिसने पहले ही तय कर लिया हो कि उसे कुछ समझना ही नहीं है फिर आपके शब्द उसके कानों तक तो पहुँचते हैं,मगर भीतर तक नहीं उतरते सब सच सामने रखते रह जाते हैं और वह अपनी बनाई हुई धारणा में ही उलझा रहता है आखिर एक वक्त के बाद इंसान समझाने की कोशिश नहीं छोड़ता,बस यह स्वीकार कर लेता है कि हर किसी को समझाया नहीं जा सकता, कुछ लोगों को वक्त ही समझाता है...!