जब कोई नखरे उठाने वाला मौजूद हो,तो नखरा खुद बढ़ जाता हैlवजह ज़िद्द नहीं होती,मान,ऐतमाद होता है,जो इंसान को मनाने वाले पर होता है कि मैं कितना ही रूठ जाऊं यह मुझे मना लेगाlजिनको मालूम हो कि उन्हें मनाया नहीं जायेगा,वो रूठना छोड़ देते हैंlयह अना की जीत तो हो रिश्तों की हार होती है!