मैं और मेरे अह्सास
पहला झूठ
पहला झूठ का चक्रव्यूह चलता रहता हैं l
झूठा इंसान दूसरों को झूठा कहता हैं ll
सत्य से अवगत होकर पश्चाता रहता है l
झूठ का बोझ हमेशा अकेला ही सहता हैं ll
पहले झूठ को कायम बरकरार रखने को l
अपने-आप को साबित करने बहता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह