Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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जय हिंद, जय हिंदी, जय हिन्दुस्तान
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कितना अजीब लगता है
कि हम हिंदी दिवस, सप्ताह, पखवाड़ा मनाते हैं,
यह हम नहीं हमारे मित्र यमराज बताते हैं,
और जमकर हम सबका उपहास करते हैं,
पर आप ही बताइए गलत क्या करते हैं?
क्योंकि हम सब हिंदी की बड़ी -बड़ी बातें तो करते हैं
दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा भी देते हैं,
मगर क्या हम कभी ये भी सोचते हैं
कि ईमानदारी से हिंदी को हम खुद कितना मान देते हैं?
हिंदी में अंग्रेजी की खिचड़ी पकाते हैं।
देश के कुछ विशेष क्षेत्रों में
कुछ विशेष लोगों के अहम का शिकार बनते
हिंदी और हिंदी भाषी लोगों को बेशर्मी से देखते रहते हैं,
तो देश में ही कुछ क्षेत्रों, लोगों और
जिम्मेदार तंत्रों द्वारा हिंदी के विरोध और अपमान पर
मौन धारण कर चुपचाप निरीह बनकर रह जाते हैं।
आजादी के आठवें दशक में भी
हिंदी की देश भर में स्वीकार्यता की
आखिर कितनी कोशिशें करते हैं?
यह विचारणीय है, मगर हम अभी भी इंतजार करते हैं,
आपको अच्छा लगे न लगे
पर यमराज अगर हमारा उपहास करता है
तो भला कौन सा गुनाह करता है?
आप ही बताइए वो ग़लत ही क्या कह रहा है?
हम हिंदी को राजभाषा का झुनझुना
पकड़ा कर बड़ा अकड़ रहे हैं,
मगर हिंदी राष्ट्रभाषा बने-
इस पर ईमानदारी से कितना काम कर रहे हैं।
हम तो कल भी हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़ा मनाते थे
आज भी मना रहे हैं
और आने वाले कल में भी मनाते ही रहेंगे,
मगर हिंदी राष्ट्रभाषा बने
इस पर ईमानदार प्रयास तो बिल्कुल नहीं करेंगे।
आप सब तो खूब मजे करो भाई
हम तो अपने यार की गालियाँ ऐसे ही सुन-सुनकर
हिंदी दिवस मनाते रहेंगे,
हिंदी की कविता, गीत, ग़ज़ल, छंदों में
अंग्रेजी की घुसपैठ करते -कराते रहेंगे,
हिंदी की समृद्धि में अपना दिखावटी योगदान देते रहेंगे
हिंदी दिवस की बधाइयाँ, शुभकामनाएं भी
देते-लेते हिंदी दिवस मनाते रहेंगे,
जय हिंद, जय हिंदी, जय हिन्दुस्तान गाते रहेंगे,
किसी तरह अपने यार यमराज को समझाते रहेंगे,
उसके बिना हम हिंदी दिवस मना भी तो नहीं पाएंगे।

सुधीर श्रीवास्तव

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 112036446
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