"हिंदी" हमारी अस्मिता का अक्षय आलोक,
संस्कृति की संवाहिका और संवेदनाओं का स्वर है।
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इसके अक्षरों में युगों का अनुभव,
शब्दों में सभ्यता का स्पंदन और
वाणी में मातृभूमि का आत्मीय स्वर है।
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हिंदी केवल संवाद का साधन नहीं,
अपितु हमारी सांस्कृतिक चेतना का सुदृढ़ सेतु है।
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यह विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर
राष्ट्रीय एकात्मता की अविरल धारा प्रवाहित करती है।
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आइए, हिंदी दिवस पर संकल्प करें—
इसकी गरिमा, माधुर्य और मौलिकता को अक्षुण्ण रखेंगे;
इसके शब्द-वैभव को जन-जन तक पहुँचाएँगे
और हिंदी को केवल दिवस का उत्सव नहीं,
अपितु जीवन की सहज अभिव्यक्ति बनाएँगे•
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