हे गणपति, जीवन के पथप्रदर्शक
हे गणपति, हे विघ्नहर्ता,
हे मंगल के दाता,
तेरे चरणों में झुकता है
हर मन, हर माथा।
जब जीवन की राहों में
अंधेरा घिर आता है,
जब अपना ही कोई अपना
दूर चला जाता है,
जब उम्मीदों का दीपक
धीरे-धीरे बुझने लगता है,
तब तेरे नाम का एक स्मरण
मन में प्रकाश भर देता है।
हे लंबोदर, तेरी विशालता
हमें बहुत कुछ सिखाती है,
दुख कितना भी बड़ा हो,
मुस्कान फिर लौट आती है।
तेरे बड़े-बड़े कान कहते हैं—
पहले सुनो, फिर बोलो,
दूसरों के दुख को समझो,
अपने शब्दों को तौलो।
तेरी छोटी-सी आँखें कहती हैं—
लक्ष्य पर ध्यान लगाओ,
दुनिया चाहे कुछ भी बोले,
अपने सत्य से मत हट जाओ।
तेरी सूंड हमें सिखाती है
जीवन के बदलते रूप,
जहाँ आवश्यकता हो कोमल बनो,
जहाँ जरूरी हो दृढ़ स्वरूप।
तेरा एकदंत कहता है—
जो सत्य हो, उसे थामे रहो,
टूटे हुए सपनों के बीच भी
आगे बढ़ते रहो।
हे गणराया,
तेरा वाहन छोटा है,
पर संदेश बहुत बड़ा—
अहंकार चाहे कितना विशाल हो,
विवेक उसे कर सकता है खड़ा।
तू सिखाता है
कि बड़ा बनने के लिए
किसी को छोटा करना जरूरी नहीं,
ज्ञान पाने के लिए
दिखावा करना जरूरी नहीं।
तू सिखाता है—
धन से पहले बुद्धि मांगो,
सफलता से पहले सद्बुद्धि मांगो,
लंबी उम्र से पहले
सार्थक जीवन मांगो।
हे गणपति बप्पा,
जब मन में क्रोध भर जाए,
तो मेरे भीतर धैर्य जगा देना।
जब मन में लोभ आ जाए,
तो संतोष का दीप जला देना।
जब अहंकार सिर उठाए,
तो विनम्रता सिखा देना।
और जब मैं स्वयं को खो दूँ,
तो मुझे फिर मेरा रास्ता दिखा देना।
कभी-कभी हम
अपनी परेशानियों को ही
अपना पूरा संसार समझ बैठते हैं,
एक छोटी-सी हार के बाद
जीवन से ही हार जाते हैं।
तब हे गणेश,
मेरे मन को समझाना—
विघ्न अंत नहीं होते,
वे तो रास्ते के शिक्षक होते हैं।
जो गिरकर फिर उठता है,
वही जीवन का अर्थ समझता है।
हे प्रथम पूज्य,
हर शुभ कार्य से पहले
तेरा स्मरण क्यों होता है?
क्योंकि मनुष्य जब
अपने अहंकार को झुकाता है,
तभी उसके भीतर
सच्चे ज्ञान का जन्म होता है।
तेरे चरणों में
मैं धन नहीं मांगती,
मैं प्रसिद्धि नहीं मांगती,
मैं दुनिया की हर खुशी भी नहीं मांगती।
बस इतनी कृपा करना—
मेरे मन में विश्वास रहे,
मेरी वाणी में मिठास रहे,
मेरे कर्मों में सच्चाई रहे,
मेरी बुद्धि में प्रकाश रहे,
और मेरे हृदय में
दूसरों के लिए करुणा रहे।
यदि कभी मेरे सामने
कठिनाइयों का पहाड़ खड़ा हो,
तो मुझे याद रहे
कि पहाड़ से बड़ा
मेरा साहस हो सकता है।
यदि कभी रास्ते बंद मिलें,
तो मुझे याद रहे
कि एक रास्ता बंद होना
यात्रा का अंत नहीं होता।
यदि कभी लोग
मेरा साथ छोड़ दें,
तो मुझे यह विश्वास रहे
कि ईश्वर का हाथ
कभी नहीं छूटता।
हे गणपति,
तू केवल मंदिरों में नहीं,
उन हाथों में भी है
जो किसी भूखे को भोजन देते हैं।
तू केवल आरती में नहीं,
उस आँसू में भी है
जो किसी दुखी के लिए बहता है।
तू केवल मूर्ति में नहीं,
उस अच्छे कर्म में है
जिससे किसी का जीवन बदल जाता है।
तू केवल उत्सव नहीं,
तू एक विचार है—
बुद्धि का,
विनम्रता का,
सत्य का,
करुणा का,
और नए आरंभ का।
हे गणपति बप्पा,
जब भी जीवन में
नई शुरुआत करूँ,
सबसे पहले तेरा नाम लूँ।
मेरी गलतियों को
मेरी कमजोरी नहीं,
मेरी सीख बना देना।
मेरी असफलताओं को
मेरी पहचान नहीं,
मेरी सीढ़ी बना देना।
मेरे सपनों को
अहंकार नहीं,
सेवा का माध्यम बना देना।
और जब जीवन की यात्रा
अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचे,
तब मेरे कर्म इतने सुंदर हों
कि मेरे जाने के बाद भी
लोग मेरे नाम से नहीं,
मेरे अच्छे कर्मों से मुझे याद करें।
हे गणपति, हे मंगलमूर्ति,
मेरे जीवन में ऐसा प्रकाश भर देना
कि मैं केवल अपने लिए नहीं,
दूसरों के लिए भी
एक छोटी-सी रोशनी बन सकूँ।
तेरा आशीर्वाद
मेरे सिर पर रहे,
तेरी कृपा
मेरे परिवार पर रहे,
तेरी बुद्धि
मेरे विचारों में रहे,
तेरी करुणा
मेरे हृदय में रहे।
और हर सुबह
जब आँख खुले,
मेरे होंठों पर बस यही नाम हो—
“गणपति बप्पा मोरया,
मेरे जीवन के हर विघ्न को दूर करो,
और मुझे इतना विवेक दो
कि मैं स्वयं किसी के जीवन का
विघ्न न बनूँ।”
🙏🌺 श्री गणेशाय नमः 🌺🙏
गणपति बप्पा मोरया