दिलों की साझेदारियाँ अक्सर खामोशियों में बदल जाती हैं।अक्सर लोग अपने रास्ते बिना हमदर्दी के मोड़ लेते हैं। अचानक उन्हें किसी की आवश्यकता नहीं होती।हम जिस मोह में बँधे होते हैं, उस मोह को वे औज़ार बनाकर हमारे ही छाती पर वार करते हैं। ये लाइलाज है, आप कुछ नहीं कर सकते।