सरकारें कभी प्रेमानंद महाराज जैसे संतों को बढ़ावा नहीं देंगी जो कि तर्कशील हैं, आपको सही मार्ग बताते हैं। उन्हें चाहिए तर्कविहीन, अंधविश्वास फैलाने वाले धीरेन्द्र शास्त्री जैसे कथावाचक जो खुलेआम पर्चियां निकाल कर सबका भविष्य बता रहे हैं। गौर करने वाली बात ये है कि त्रासदियों के समय ये पर्ची काम नहीं करती।
जिन्हें वोट चाहिए वो क्यों चाहेंगे कि आप प्रश्न पूछने के योग्य बने, क्यों तर्क करें?, क्यों अपना अच्छा बुरा सोचें? धर्म जाति के नाम पर बटते रहिए और अंधविश्वास में डूबे रहिए।