प्रकृति क्रूर नहीं होती है वो तो जैसे होती है वैसे ही है ! कोई भी क्रूर नहीं होता है वो वैसे ही है जैसा होता है ! समस्त विचलन एवं द्वन्द्व “होता है” एवं “होना चाहिए” से हैं ! “होता है” पर किसी का नियंत्रण नहीं किंतु “होना चाहिए” पर तो है ही ! इस पर ध्यान दे सकते हैं हम !