आत्ममुग्धता अच्छी चीज़ होती हैं अगर वो दूसरों को नीचा दिखाने के लिए न हो तो,आत्ममुग्ध इंसान स्वयं में हीं परेशान रहता "मैं" से बाहर निकल हीं नहीं पाता वो दूसरों को क्या जज करेगा,कौन क्या कर रहा,कैसा दिखता,किसके दांत बड़े किसकी नाक टेढ़ी है।
वो दूसरों के फटे में टांग नहीं लड़ाता।