“ज़िद में हासिल की हुई चीज़ शायद हमें सुकून दे दे, मगर अगर उसमें सामने वाले की रज़ामंदी और खुशी शामिल न हो, तो वो हासिल होकर भी अधूरी रहती है।”
“किसी को अपनी ज़िद से पा लेना जीत नहीं होती… जीत तब होती है, जब वो इंसान अपनी खुशी से आपके पास रहना चाहे।”
“ज़बरदस्ती रोका हुआ इंसान आपके पास तो रह सकता है, मगर उसका दिल नहीं… और दिल के बिना मिला साथ, साथ नहीं सिर्फ़ एक ज़िद होती है।”
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