मैं और मेरे अह्सास
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार है l
भाई बहन का प्यारा बंधन हैं ll
बहन माँ की परछाई होती हैं l
सब के दिल में प्यार बोती हैं ll
अपने अपनों की ख़ातिर वो l
चैन और सुकून भी खोती हैं ll
पूरा घर संभालने की झंझट में l
आराम से कहा वो सोती हैं ll
ईस्वर से प्रार्थना करते समय l
भाई की खुशी के लिए रोती हैं ll
माँ बाप भाई बहन की दुलारी l
घर का वो अनमोल मोती हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह