कभी थक जाओ राहों में, तो जरा सा ठहर जाना,
ना हारना खुद से कभी, बस थोड़ा संभल जाना।
उम्मीदों के दिए जलाकर, अँधेरों को मिटाना है,
तूफान कितना भी गहरा हो, दीया बनकर टिमटिमाना है।
जो छूट गया पीछे, उसे मुड़कर क्यों देखना,
जो आज तुम्हारे पास है, उसी में खुदा को देखना।
गिरे हो अगर जमीन पर, तो उठना भी तुम्हीं को है,
सपनों के आसमान में, फिर उड़ना भी तुम्हीं को है।
- Ritu jaiswal