Hindi Quote in Thought by Mayur Chaudhary

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रावण मर चुका था, युद्ध खत्म हो चुका था।
सीता माँ को वापस लाया जा रहा था।
लेकिन जब सीता राम के सामने आईं, तो राम ने नज़रें झुका लीं।
सीता रुक गईं।उन्होंने राम की आँखों में देखा और समझ गईं कि कुछ गलत है।
राम ने काँपती आवाज़ में कहा- "सीता... अग्नि परीक्षा देनी होगी।"
पूरी सभा में सन्नाटा छा गया।
हनुमान का सिर झुक गया, लक्ष्मण की आँखें भर आईं, विभीषण स्तब्ध रह गए।सीता कुछ पल चुप रहीं।
फिर उन्होंने राम की आँखों में देखा और मुस्कुराई-
वह मुस्कान दुनिया की सबसे दर्दनाक मुस्कान थी।
सीता बोलीं- "राम... तुमने माँगा तो है।
इतना कहकर वे अग्नि की ओर बढ़ गईं।
बिना रुके, बिना काँपे, बिना एक भी आँसू बहाए।
और उसी क्षण राम की आँखों से आँसू निकल पड़े।
क्योंकि राम जानते थे कि सीता निर्दोष हैं, लेकिन राजधर्म उनसे यह करवाने को मजबूर कर रहा था।
सीता ने बिना कोई सवाल किए अग्नि में कदम रखा, क्योंकि राम ने कहा था।यही प्रेम था, यही विश्वास था।
आज के समय में लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ देते हैं,थोड़ी सी तकलीफ में साथ छोड़ देते हैं।
लेकिन सीता ने अग्नि में जाकर भी राम पर भरोसा नहीं छोड़ा।
क्योंकि सच्चे रिश्ते आग में जलते नहीं, बल्कि निखरते हैं।
"सीता की ताकत तलवार में नहीं थी...
सीता की ताकत उस विश्वास में थी. जो आग में भी नहीं जला।

Hindi Thought by Mayur Chaudhary : 112033963
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