जैसे सावन की पहली फुहार मन की उदासी को चुपचाप धो देती है और कड़क चाय की चुस्की भीतर की थकान को कुछ पल के लिए पिघला देती है; ठीक वैसा ही असर तुम्हारी सादगी का है. इस बनावटी दुनिया के शोर में तुम्हारा महज़ ख़याल ही मन के तमाम खालीपन को मुकम्मल सुकून से भर देता है…🤍:)