*सच्चाई , अग्नि परीक्षा की *
आदर्शों से लिखी थी इक प्रेम कहानी।
महलों को त्याग वन में रहने आए एक राजा रानी।
पितृ वचन निभाने हेतु चौदह बरस वन में बिताए।
ना साथ छोड़ा ना डगमगाए।
जब आई इक रोज शूपनखा था जिसे अपने पर अभिमान।
राम की सुंदरता देख उनसे किया अपने प्रेम का बखान।
राम ने मना किया तो दिया उसने अपनी आसुरी प्रवृत्ति का प्रमाण।
सीता को मारने की की कोशिश पर लक्ष्मण ने काटा नाक और कान।
राम ने लक्ष्मण को समझाया।
एक स्त्री को विक्षिप्त कर उसने स्वयं समस्या को बुलवाया।
सीता भयभीत हुई तब राम ने किया अग्नि देव का आह्वान।।
सिया को संग में ले गए अग्नि देव इसका लक्ष्मण को भी नहीं था भान।
और वहां छोड़ गए सीता की छाया।
फिर शूपनखा का बड़ा भाई रावण सीता को चुराने आया।
उसने सीता समझ कर किया छाया सीता का हरण ।
राम गए करने रावण मर्दन।
फिर मिले हनुमान संग वानर सेना।
जिन्होंने मार गिराई रावण संग पूरी असुर सेना।
अब आई फिर से वेला मिलन की।
राम ने कही बात अग्नि परिक्षण की।
इस बात से सब में हुआ विरोधाभास।
परंतु राम को बुलाना था अपनी सीता को पास।
फिर राम ने सबको सच्ची बात बताई।
और राम की असली सीता उनके संग लौट के अवध आई।
ऐसी आदर्श कथा शान आपको बताती है।
आपके समक्ष अग्नि परीक्षा की सच्चाई लाती है।
*- सृष्टि तिवारी शान*