Hindi Quote in Poem by Ahad Rayeen

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

// मानसिक तिलिस्म //

मैं ना बंदी बना था,
ना ही गुलाम मुक्कर
खुला था इतना सा था
डरता, उड़ता नहीं था।

कुछ था अंदर धंसा हुआ,
टूटे कांच सा गढ़ा हुआ,
हर दम फिरता विचरता
अंधे कुंवे में तस्वीर खीचता।

मेरे सा रोज़ मरता मुर्दा बोलता,
कफ़न बगैर जीवन काटता था
मन कीचड़ मलिन, मस्तिष्क
भूतों का हरदम घेरा डला था।

चार पल चैन नहीं रुकता, धमकता
बेचैनी जगत की मायाजाल चढ़ता
स्वर्ण पाकर, कंकड़ चबाया करता,
फिर देखो, मैं ना ही बंदी बना था।

रोज़ यूँही मरी मौत से जागकर उठा था,
उस रोज़ कुछ भीतर जुड़ा घटा बढ़ा था,
साथ पसीजा और अंधकार तब्दील था
उस पल मेरा मानसिक तिलिस्म टूटा था।
©DSR

Hindi Poem by Ahad Rayeen : 112030620
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now