*Title: "रणचंडी की ललकार"*
सिंह गर्जना गूंज रही, धरती डगमग डोल,
खड्ग उठा है वीर का, लहू में शोणित खोल।
नस-नस में अंगारा है, आंखों में ज्वाला है,
मातृभूमि की पुकार है, सीने में ज्वाला है।
कौन कहे कि हम डरे, कौन कहे कि झुके,
हम वो वंशज हैं जिसके नाम से तूफां रुके।
इतिहास गवाह है, जब-जब संकट आया,
राजपूत, मराठा, जाट ने शीश कटाया।
रणभेरी बज उठी, घोड़े हिनहिनाए,
ध्वजा लहराई वीर की, दुश्मन थर्राए।
सीने पर गोली खाएंगे, पर पीठ ना दिखाएंगे,
माँ की माटी के लिए, सौ-सौ जान लुटाएंगे।
अर्जुन सा निशाना है, भीम सा बाहुबल है,
हनुमान सी ताकत है, शिवाजी सा जज्बा है।
क्या फर्क पड़ता है, कितनी बड़ी फौज है,
जब इरादे फौलाद हों, तो कायरता मौज है?
खून से लथपथ वर्दी, पर माथा ऊंचा है,
आखिरी सांस तक लड़ेगा, यही वचन सच्चा है।
घर आंगन में बेसब्री से मां राह देखती,
बहन राखी के धागे से वीर की जीत बुनती।
ओ दुश्मन सुन ले, ये हिंदुस्तान है,
यहां हर गली में भगत, हर घर में जवान है।
तोड़ देंगे तेरे इरादे, मिटा देंगे नामोनिशान,
तिरंगा झुकेगा नहीं, चाहे लग जाए जान।
वीरता कोई कहानी नहीं, ये संस्कार है,
मरना सिखाती है, पर हारना नहीं सिखाती है।
जो डर गया वो मर गया, जो लड़ा वो अमर हुआ,
अशोक, प्रताप, राणा के नाम से जग थर-थर हुआ।
चलो उठो नौजवानों, समय पुकार रहा,
सरहद पर वीर सपूत, अपना फर्ज निभा रहा।
तुम कलम उठाओ, वो बंदूक उठाए,
देश बचेगा तभी, जब दोनों साथ निभाए।
ये माटी कर्जदार है, उन शहीदों की,
जिनकी चिताओं से आजादी की खुशबू आई।
उनकी शहादत को व्यर्थ ना जाने देंगे,
भारत माँ के मस्तक को कभी झुकने ना देंगे।
जय हिंद की सेना, जय भारत माँ,
वीर सपूतों को शत-शत प्रणाम।
जब तक सूरज चांद रहेगा,
तेरा नाम वीर, जग में गूंजता रहेगा।
*जय हिंद! जय भारत!* 🇮🇳