मैं और मेरे अह्सास
अनचाही राह
अनचाही राहों से ख़ुद को हटा देना चाहिए l
दिलों दिमाग से रास्तें ही मिटा देना चाहिए ll
एक की जिम्मेदारी नहीं मोहब्बत निभाने की l
जिसे परवा ना उसे धूल चटा देना चाहिए ll
आख़िर मुलाकात के समय बिछड़ते वक्त l
करनेवाली बात दिल को रटा देना चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह