समाज में सबसे उपेक्षित रिश्ता - पत्नी
समाज में सबसे उपेक्षित
रिश्ता, जो हमेशा पराया ही होता
पुरुष समाज से करती शिकायत
एक नारी एक पत्नी
माँ, बहन, भाभी, चाची, मामी
दिया तुमने सबको सम्मान
तो फिर क्यूँ बनाया
इसी रिश्ते का मजाक
पत्नी को तो परिवार में ही ना गिनते
सब घरवाले अपने
पत्नी हमेशा पराई
क्योंकि वो पराए घर से आई
क्या सिर्फ तुम्हारा
काम करने वो आई
नहीं स्वतंत्रता उसे कुछ
अपने मन का करने की
जरूरी है आज्ञा पति की
अपने घर जाने में भी
सारी बातें क्यूँ उससे जाती छुपाई
सेवा करना धर्म है उसका
किस हक से जब बात-बात पर
ताना मारो दूसरे घर से है आई
कौन सा घर पत्नी का होता
माँ-बाप का भी छूटा
और ससुराल भी ना अपना
कफन भी जब मायके से आए
तो क्या करने ससुराल आए
क्यों पुरुषों को अच्छी लगती
सिर्फ गूंगी-बहरी कामवाली
अगर अपने हक के लिए
कुछ बोले तो करते उसकी बुराई
अगर है गृहिणी पत्नी तो
दो रोटी का भी ताना देते
है कमाऊ तो भी
कौन सा मनमर्जी करने देते
रवा तो लेते हो पत्नी की कमाई
पर फिर भी पत्नी पराई
पत्नी चाहे बूढ़ी हो जाए सेवा करते
फिर भी कहलाती क्यों
दूसरे घर से आई
क्यों ये दोगलापन तुम्हारा
अपनी माँ के लिए सम्मान
अपने बच्चों की माँ का करे अपमान
सिर्फ परवरिश का फर्क है
पत्नी की जगह खुद को रख
कर देखो
एक बार सोच बदलकर देखो
क्या यही थी वो कसम
जो तुमने सात फेरो पर खाई
पत्नी साथ दे अगर
तो पति को भी देना चाहिए
साथ निभाई
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली